इस्लाम धर्म क्या है?

दुनिया में जितने भी धर्म पाए जाते हैं, चाहे वे प्राचीन हों या आधुनिक, उनमें रीति-रिवाजों और किस्से-कहानियों का बड़ा प्रभाव होता है। कुछ धर्मों की तो नींव ही रीति-रिवाजों पर रखी गई है और कुछ में बाद के लोगों ने इन्हें इस तरह शामिल कर दिया जैसे वे धर्म का मूल अंग हों। यहूदी धर्म और ईसाई धर्म शुद्ध आसमानी धर्म थे। उनकी शिक्षाएँ तौहीद (एकेश्वरवाद) और पैग़म्बरी पर आधारित थीं। उनके पास ख़ुदाई किताबें तौरात और इंजील की शक्ल में मौजूद थीं। लेकिन इन लोगों ने उन किताबों में हेरफेर की, यहाँ तक कि उनमें से बहुत कुछ बदल दिया गया और उनकी असली शिक्षा विकृत हो गई।

इनके अलावा अन्य जो धर्म हैं उनका न तो पूरा इतिहास सुरक्षित है और न ही उनकी शिक्षाएँ। उनकी शिक्षाओं में किस्से-कहानियाँ इतनी मिल चुकी हैं कि अब सच और झूठ को अलग करना लगभग असंभव हो गया है। इस मामले में इस्लाम धर्म को विशेषता प्राप्त है।

इस्लाम धर्म की यह विशेषता है कि इसकी शिक्षाएँ आज तक ज्यों की त्यों सुरक्षित हैं। इसमें किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं हुआ है। अल्लाह तआला ने अपने पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद ﷺ को जो कुछ सिखाया और जो आदेश दिए, वे आज चौदह सौ साल बाद भी उसी तरह मुसलमानों के पास क़ुरआन और हदीस की शक्ल में मौजूद हैं।

आज के दौर में भी जो लोग हदीस पढ़ते हैं, वे स्नद )शैक्षणिक श्रृंखला) के साथ पढ़ते हैं। यानी हदीस के सिलसिले में जो लोग पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ से लेकर आज तक जुड़े हुए हैं, उनके नाम किताबों में सुरक्षित हैं।

इस्लाम धर्म की यह विशेषता है कि इसके आदेश पहले जैसे लाभकारी थे, आज भी उतने ही लाभकारी हैं और क़ियामत (महाप्रलय) तक उनकी उपयोगिता बनी रहेगी। अल्लाह तआला ने इस धर्म को ऐसी विशेषताओं से सजाया है कि यह क़ियामत (महाप्रलय) तक आने वाले इंसानों की राहनुमाई के लिए पर्याप्त है।

इसमें इंसान को उन सभी चीज़ों की शिक्षा दी गई है जिनकी उसे ज़रूरत है और जिन पर अमल करके वह अपनी मानवीय गरिमा को बनाए रखते हुए अपना धार्मिक पहचान भी सुरक्षित रख सकता है।

उदाहरण के तौर पर:

  • इंसान के लिए खाना-पीना आवश्यक है। इस्लाम ने स्पष्ट कर दिया कि कौन-सी चीजें खानी हैं और किनसे बचना है, और यह भी बताया कि उनसे क्यों बचना है।
  • वस्त्रों के मामले में बताया कि पुरुषों को कैसे कपड़े पहनने चाहिए और औरतों को कैसे कपड़े पहनने चाहिए।
  • रमज़ान के महीने में रोज़ा रखना ज़रूरी है।
  • हर साल अपनी संपत्ति का ढाई प्रतिशत ज़कात (धार्मिक अनिवार्य दान) देना है।
  • ग़रीबों की मदद करना और भूखों को खाना खिलाना है।
  • नमाज़ अदा करनी है।
  • दूसरों को तकलीफ़ देने से बचना है।
  • रोज़ी कमाना ज़रूरी है, लेकिन दूसरों का हक़ मारकर या उन्हें नुकसान पहुँचा कर कमाना हराम (निषिद्ध) है।

इस्लाम की यह विशेषता है कि यह आख़िरी धर्म है। अब इसके बाद कोई नया धर्म नहीं आएगा। जैसा कि अल्लाह तआला ने फ़रमाया:आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म को पूरा कर दिया, तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए धर्म के रूप में इस्लाम को पसंद किया। अब दुनिया में कोई नबी नहीं आएगा, क्योंकि हज़रत मुहम्मद ﷺ के बाद नबूवत का सिलसिला ख़त्म कर दिया गया है।

इस्लाम धर्म की शिक्षाएँ आज भी सुरक्षित हैं, क्योंकि इसकी हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी किसी इंसान के हाथ में नहीं है बल्कि ख़ुद अल्लाह ने यह ज़िम्मेदारी ली है। अल्लाह फ़रमाते हैं: निस्संदेह हमने ही इसे (क़ुरआन) उतारा है और हम ही इसकी हिफ़ाज़त करेंगे।
जब अल्लाह ख़ुद इसका निगहबान है तो कोई इसे नुकसान नहीं पहुँचा सकता।

इस्लाम की शिक्षाएँ तीन मूल सिद्धांतों पर आधारित हैं:

  1. तौहीद (एकेश्वरवाद) — यानी इस बात का स्वीकार करना कि अल्लाह तआला अकेला है, उसका कोई साझी नहीं है।
  2. रिसालत (पैग़म्बरी) — यानी यह मानना कि हज़रत मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं और जो कुछ उन्होंने बताया है उस पर अमल करना ज़रूरी है।
  3. आख़िरत (परलोक) — यानी यह मानना कि हर इंसान को मरने के बाद दोबारा ज़िंदा किया जाएगा और इस दुनिया में किए गए हर काम का हिसाब लिया जाएगा।

यही इस्लाम धर्म के बुनियादी अक़ीदे हैं। इनकी तफ़सील आगे आएगी।

14 thoughts on “इस्लाम धर्म क्या है?”

  1. Weldon Sir! Very very useful work for humanity specially for Hindi readers. It is a big need of the time to spread the message of truth,fair, love, brotherhood and humanity taught by the religion of Islam. Really you and your team are deserve to be appreciated for this initiative and noble task!

  2. पैगंबर इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत पर यह एक अहम काम है जो बहुत पहले होना था माशाल्लाह आप लोगों ने इसको शुरू करके बहुत अच्छा किया है इसके जरिए से इस्लाम की तालीमत लोगों में फैलेगी और जो लोग गलतफहमियों का शिकार है उसकी गलतफहमी दूर होगी

  3. “इस लेख ने कई भ्रांतियों को दूर किया और इस्लाम के मूल सिद्धांतों को सही रूप में समझाया।
    इस लेख से यह स्पष्ट होता है कि इस्लाम की शिक्षाएँ हर दौर के लिए मार्गदर्शक हैं। यह प्रयास सराहनीय है।
    बेहतरीन लेखन के लिए धन्यवाद।”

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