असजद उकाबी अनुवादक अर्शद अली

इस्लाम धर्म क्या है?

दुनिया में जितने भी धर्म पाए जाते हैं, चाहे वे प्राचीन हों या आधुनिक, उनमें रीति-रिवाजों और किस्से-कहानियों का बड़ा प्रभाव होता है। कुछ धर्मों की तो नींव ही रीति-रिवाजों पर रखी गई है और कुछ में बाद के लोगों ने इन्हें इस तरह शामिल कर दिया जैसे वे धर्म का मूल अंग हों। यहूदी […]

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पैग़म्बर-ए-इस्लाम ﷺ की जीवन-चरित्र के अध्ययन की महत्ता और उपयोगिता

यह लेख पैग़म्बर-ए-इस्लाम ﷺ के जीवन-चरित्र (सीरत) के अध्ययन की महत्ता और उपयोगिता को स्पष्ट करता है। इसमें बताया गया है कि सीरत के ऐतिहासिक और व्यावहारिक दोनों पहलू मुसलमानों की व्यक्तिगत और सामाजिक ज़िंदगी के लिए मार्गदर्शक हैं। क़ुरआन और हदीस की रोशनी में नबी ﷺ के उत्तम चरित्र, इबादत, सामाजिक व्यवहार, न्याय और रहमत जैसे गुणों को सामने लाया गया है। साथ ही, आज के दौर में उठाए जाने वाले सवालों और आपत्तियों के संतोषजनक उत्तर भी सीरत के अध्ययन से प्राप्त किए जा सकते हैं।

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क़ुरआन क्या है?

क़ुरआन अल्लाह का कलाम (सन्देश) है, जिसे आखिरी सन्देष्टा पैगंबर मोहम्मद सल्ललाहो अलैहि व सल्लम को फ़रिश्ते जिब्रईल द्वारा सुनाया था। क़ुरआन अल्लाह सर्वशक्तिमान की पवित्र और गौरवशाली पुस्तक है जो अपने अवतरित के समय से लेकर आज तक अपनी मूल स्थिति में संरक्षित है। पवित्र क़ुरआन आखिरी किताब है जिसे अल्लाह सर्वशक्तिमान ने दुनिया में

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इस्लाम में पैगंबर कौन हैं?

दुनिया में रहने वाला हर कोई यह जानता और मानता है कि एक ऐसा प्राणी है जो पूरी दुनिया की व्यवस्था चला रहा है और उसके आदेश के अतिरिक्त दुनिया में कुछ भी नहीं होता है। लेकिन ईश्वर की जो अवधारणा इस्लाम धर्म में मिलती है और जिस तरह इस्लाम धर्म में ईश्वर का वर्णन

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तौहीद क्या है

मानव इतिहास बताता है कि ईश्वर की अवधारणा दुनिया में रहने वाले सभी मनुष्यों में मौजूद है। दुनिया के सभी धर्म आमंत्रित करते हैं कि एक ऐसा प्राणी है जो सबसे महान और सबसे शक्तिशाली है। यूनानी दार्शनिक हों या अज्ञानी, सभी के पास एक ईश्वर का विचार है। यह अवधारणा अभी भी यहूदी, ईसाई,

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पर्दा की शरीया कानूनी स्थिति और वर्तमान युग की मानसिकता

यह पोस्ट इस्लाम में महिला के स्थान और हिजाब व पर्दा की अहमियत पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि इस्लाम ने महिला को सम्मान, गरिमा और मूल अधिकार दिए हैं—चाहे वह माँ हो, बहन हो या पत्नी। कुरान और हदीस की रोशनी में पर्दे के नियमों को स्पष्ट किया गया है और समझाया गया है कि हिजाब महिला की इज़्ज़त और हया (शालीनता) की रक्षा करता है। साथ ही यह भी उल्लेख है कि आधुनिकता और झूठे स्वतंत्रता के नारों के नाम पर महिलाओं को घर से बाहर निकालने और हिजाब से दूर करने की कोशिश की जा रही है। लेख में वर्तमान हालात, जैसे भारत में हिजाब पर रोक के मामलों को भी सामने रखा गया है और सवाल किया गया है कि महिलाओं के असली अधिकार—हिजाब के अधिकार—की अनदेखी क्यों की जाती है।
यह लेख इस बात पर ज़ोर देता है कि पर्दा महिला के लिए कैद नहीं, बल्कि उसकी गरिमा, पवित्रता और सम्मान का प्रतीक है।

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